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Monday, 16 June 2014


इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता। बेसिक शिक्षा पिरषद के प्राइमरी स्कूलों में 1.72 लाख शिक्षािमत्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन की प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। बीटीसी प्रशिक्षु शिवम राजन की ओर से दायर यािचका की सुनवाई सोमवार को जिस्टस पीकेएस बघेल की कोर्ट में होगी। यािचकाकर्ता का तर्क है कि प्रदेश सरकार िनशुल्क और अिनवार्य शिक्षा का अधिकार अिधिनयम (आरटीई) 2009 में शिक्षक भर्ती के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता में छूट नहीं दे सकती। प्रदेश सरकार ने शिक्षािमत्रों को टीईटी से छूट दिए जाने की अनुमित केंद्र सरकार से पहले कभी नहीं मांगी है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा पिरषद ने 23 अगस्त 2010 और 29 जुलाई 2011 की अिधसूचना में जो न्यूनतम योग्यता तय की है उसके अनुसार स्नातक, दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण के साथ टीईटी पास होना अिनवार्य है। प्रदेश सरकार बीएड िडग्रीधािरयों के मामले में िनयमों में छूट मांग चुकी है। जिंसके अनुसार उत्तर प्रदेश में बीएड िडग्रीधािरयों को मार्च 2014 तक प्राइमरी स्कूल में शिक्षक िनयुक्त करने की छूट मिली थी। इसलिए 30 मई को अध्यापक सेवा िनयमावली 1981 में किया गया 19वां संशोधन आरटीई एक्ट के विरुद्ध है। गौरतलब है कि शिक्षािमत्रों को सितंबर 2015 तक समायोिजत करने की तैयारी है। यह प्रक्रिया 30 जून से शुरू होनी है। इसके लिए 7 जुलाई कोजिंलेवार विज्ञापन जारी होगा। 14-15 जुलाई को काउिंसिलंग करवाने के बाद 31 जुलाई तक समायोजन होना है। पहले चरण में एक महीने के भीतर लगभग 58 हजार शिक्षािमत्रों को सहायक अध्यापक की नौकरी देनी है। उत्तराखंड में टीईटी मुक्त समायोजन पर है रोकउत्तर प्रदेश से पहले उत्तराखंड सरकार भी शिक्षािमत्रों के टीईटी मुक्त समायोजन का प्रयास कर चुकी है। 4 मार्च 2014 को उत्तराखंड सरकार ने शिक्षािमत्रों के टीईटी मुक्त समायोजन का आदेश जारी किया था। जिंस पर 14 मार्च 2014 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। यह रोक इसलिए लगाई की प्रदेश सरकार को टीईटी से छूट देने का अधिकार नहीं है। शिक्षािमत्रों ने हाईकोर्ट में की है कैविएटउत्तर प्रदेश शिक्षािमत्र शिक्षक कल्याण सिमित ने हाईकोर्ट में कैविएट दायर कर रखी है। सिमित के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा ने बेिसक शिक्षा िनयमावली में संशोधन की अिधसूचना 30 मई को जारी होने के बाद हाईकोर्ट में कैविएट दायर की ताकि इस संशोधन को यिद कोई चुनौती दे तो शिक्षािमत्रों का पक्ष भी सुना जाए।

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