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Sunday, 11 September 2016

वर्षो से जमे लिपिकों का स्थानांतरण रुकवाने को सारे जतन, अफसर आमने सामने

वर्षो से जमे लिपिकों का स्थानांतरण रुकवाने को सारे जतन, तबादलों पर अफसर आमने-सामने, अपर निदेशक बेसिक के आदेश को बदलवाने में जुटे माध्यमिक के अफसर, लिपिकों को पूर्व का कार्यालय और पुरानी सीट को लेकर दोनों पक्ष अड़े

इलाहाबाद : मातहत कर्मियों के नफा-नुकसान पर शिक्षा विभाग के अफसर आमने-सामने हैं। एक ही जगह पर वर्षो से जमे लिपिकों का स्थानांतरण रुकवाने को सारे जतन किए जा रहे हैं। अफसरों की शह पर लिपिक आंदोलन की राह पर हैं। जिनके इशारे पर धरना-प्रदर्शन शुरू हुआ अब वही अफसर आंदोलन खत्म कराने का दबाव बना रहे हैं, इसका असर यह हुआ कि स्थानांतरण में संशोधन होने के आसार हैं, लेकिन पुराना कार्यालय एवं छीनी गई सीट लिपिक को दोबारा न देने पर दूसरे अफसर भी अड़ गए हैं। 

शासन की तबादला नीति के अनुरूप सूबे में लिपिकों के भी तबादले हुए हैं। राजकीय कालेजों एवं जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालयों में वर्षो से जमे 160 लिपिकों का स्थानांतरण दूसरे मंडलों एवं उन जिलों में किया गया, जहां वह पहले तैनात नहीं थे। आदेश जारी हुए कई माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक अधिकांश ने नई तैनाती स्थल की ओर से रुख नहीं किया है, बल्कि वह पहले तबादला निरस्त कराने या फिर उसमें संशोधन कराने को प्रयासरत हैं। पहले शिक्षा निदेशालय पर धरना-प्रदर्शन किया और इस समय राजधानी में लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके बाद भी सभी तबादले रद करने को महकमा तैयार नहीं है। माध्यमिक शिक्षा के बड़े अफसर उनकी पैरवी कर रहे हैं, उनका कहना है कि आंदोलन खत्म कराया जाए, इसका असर कामकाज पर पड़ रहा है। इसके बाद अपर निदेशक बेसिक शिक्षा एवं अन्य अफसरों ने लिपिकों से वार्ता की है, लेकिन तबादला रद करने, पुराना कार्यालय व पुरानी सीट फिर से देने पर वह सहमत नहीं है। 

अफसरों का कहना है कि दबाव में आकर दोबारा वहां नहीं भेजा जाएगा, जहां से उन्हें हटाया गया है। यह जरूर है कि उसी जिले में दूसरा कार्यालय दिया जाएगा। दरअसल आदेश का अनुपालन न होने की मुख्य वजह शिक्षा निदेशालय के जिस अफसर ने यह तबादले किए हैं वह आदेश न मानने वालों पर कार्रवाई नहीं कर सकता, जिन अफसरों को कार्रवाई करनी चाहिए वह लिपिकों के पक्ष में हैं। इधर जेडी कार्यालय, राज्य शिक्षा संस्थान सहित अन्य कार्यालयों में धरना चल रहा था। तबादलों में संशोधन करने के वादे पर आंदोलन शनिवार को खत्म हो गया है, लेकिन पुरानी सीट व कार्यालय मिलने के आसार नहीं है।

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