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Monday, 10 October 2016

नई पेंशन योजना को हाईकोर्ट में चुनौती, प्राथमिक सुनवाई के बाद केन्द्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी*

नई पेंशन योजना को हाईकोर्ट में चुनौती, प्राथमिक सुनवाई के बाद केन्द्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी*

अहमदाबाद।केन्द्र सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों के लिए घोषित की गई नई पेंशन योजना (एनपीएस) को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी व न्यायाधीश वी. एम. पंचोली
की खंडपीठ ने शुक्रवार को मामले की प्राथमिक सुनवाई के बाद केन्द्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई नवम्बर में होगी।
इसरो के सेवानिवृत्त 72 वर्षीय वैज्ञानिक प्रणव एस. देसाई की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि केन्द्र सरकार की ओर से नई पेंशन योजना जारी की गई है। नई योजना संविधान की धारा 14,16,19 व 21 का उल्लंघन है। जिसके तहत यह पेंशनरों की ओर से कमाए गए पैसे को अपनी इच्छा से खर्च करने की स्वतंत्रता को छीनती है। इस योजना को असंवैधानिक करार दिया जाना चाहिए। नई पेंशन योजना उन सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू होगी जिनकी भर्ती 1 जनवरी 2004 के बाद की गई है। नई पेंशन योजना शेयर बाजार के साथ जुड़ी हुई है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आने का प्रभाव पेंशन धारकों पर भी पड़ेगा। भारतीय सेना के लिए जिस तरह से वन रैंक-वन पेंशन की योजना को अमली किया गया है उसी तरह अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए एक समान योजना होनी चाहिए। याचिका में इस योजना को पेंशन फंड नियामक व विकास अधिनियम, 2013 के तहत अंसवैधानिक करार दिए जाने की मांग की गई है। नई योजना पेंशनरों को एक समान सुरक्षा नहीं देती है।
याचिका में कहा गया है कि क्या सरकार अपने कर्मचारियों को बिना उनकी मर्जी के फंड का निवेश निजी कंपनी में कर सकती है? नई योजना जननीति के खिलाफ है जो स्वयं पेंशनरों के बीच विभेद पैदा करती है।

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