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Tuesday, 22 November 2016

Jrt की आज की सुनवाई की डिटेल्स योगेंद्र यादव की कलम से

*जूनियर अपडेट। कुछ खास*

*M.p. Singh with Yogendra Yadav and 10 others.*

# योगेंद्र_यादव_की_धारदार_कलम
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"जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्क़ाम कर देंगे
कमीशन दो तो हिन्दोस्तान को नीलाम कर देंगे
ये बन्दे-मातरम का गीत गाते हैं सुबह उठकर
मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगुना दाम कर देंगे
सदन में घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे
वो अगली योजना में घूसखोरी आम कर देंगे।"
'अदम गोंडवी'
साथियों नमस्कार,
आज बहु चर्चित जूनियर भर्ती (चयन आधार) पर मा. हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश महोदय की बेंच में मामला अपराह्न 2.15 बजे टेक अप हुआ,सर्व प्रथम न्यायमूर्ति महोदय ने हमारी ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता व् सर्विस मैटर के एनसाइक्लोपीडिया श्री अशोक खरे साहब को ही सुनना पसंद किया,विरोधियों की ओर से बीच बीच में उठ रही आपत्तियों को धोते हुये खरे साहब ने पूरे डेढ़ घण्टे तक ज़िरह की,खरे साहब को बहस के दौरान हमारे वरिष्ठ अधिवक्ता श्री नवीन शर्मा जी ने कुछ यूँ असिस्ट किया जैसे कि एक जहाज को कैप्टन और सह कैप्टन तूफानी धाराओं से पार करते हुये मंजिल तक ले जाते हैं।
क्लॉज 9 A व् 9 बी पर विस्तृत बहस होने के बाद 12वां संसोधन,15वां संसोधन तथा 16 वां संसोधन ही बहस का केंद्र बिंदु रहा।सरकार की ओर से खड़े हुये वरिष्ठ अधिवक्ता जहाँ यही चिल्लाते रह गये कि न्यूनतम अर्हता निश्चित करना राज्य सरकार का अधिकार है किंतु न्यायमूर्ति महोदय ने शिक्षा जैसी अति महत्वपूर्ण विषय वस्तु पर प्रतियोगिता और योग्यता पर ही बल दिया।न्यायमूर्ति महोदय के अनुसार जब 72825 भर्ती प्रक्रिया वृहद पीठ से विजित होकर शीर्ष न्यायालय में भी (टी ई टी मेरिट)अंतरिम आदेश के अधीन पूरी भर्ती प्रक्रिया सम्पन्न हो रही है तथा 15वां संसोधन अल्ट्रवायरस है फिर यह भर्ती प्रक्रिया किस आधार पर की जा रही है?सरकार के वरिष्ठ स्टैंडिंग काउन्सिल मानो नकल समर्थक सरकार की कर गुजारियों पर पर्दा ही डालते दिखे तथा दिसम्बर की डेट की माँग करने लगे,न्यायमूर्ति महोदय ने यह कहते हुये कि यह मुद्दा अति महत्वपूर्ण है तथा इस मामले में बड़े बड़े अधिवक्ता उपस्थित हो रहे हैं तथा उनका समय इस तरह इतनी लंबी डेट देकर खराब नही किया जा सकता,पूरे मामले को अंतिम निर्णय की सुनवाई होने तक कल पुनः अपराह्न 2 बजे (23/11/
2016)अनवरत रूप से लगा दिया।सरकार के वकील और दलील हमारी योग्यता की लड़ाई के आगे मानो अभी से पराजय की मुद्रा में आ गये हों।
अकादमिक आधार पर अब तक हुयी कुल नियुक्तियाँ 29334(जूनियर विज्ञान),15000 बी टी सी,16000 बी टी सी तथा 3500 उर्दू सहायक अध्यापक के लिये निकट भविष्य में संकट उत्तपन्न होना तय है।साथियों मैं यह नही कहता कि अकादमिक अंको पर चयन पाने वाले सभी साथी अयोग्य और नकलची हैं किंतु न्यायमूर्ति महोदय ने भी आज टिप्पड़ी करते हुये यह स्वीकार किया कि 70%टी ई टी अंक प्राप्त करने वाला 60%टी ई टी अंक धारक से बुद्धिजीवी ही होगा यह प्रतियोगिता का नियम कहता है।साथियों जिन्होंने भी 1996 से पूर्व हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की होगी निश्चित रूप से तब उन्होंने उस परीक्षा को मानो हथकड़ी के साये में ही दिया होगा,आज बड़ा दुर्भाग्य है के नाइंटी परसेंट वाला नाइंटी की स्पेलिंग तक ठीक से नही लिख पाता।मैं आरम्भ से ही योग्यता के क्षेत्र में खुली प्रतियोगिता का प्रबल समर्थक रहा हूँ,एक बार अकादमिक अंकों का प्राप्त किया गया स्कोर उस समय अवश्य महत्वहीन होना चाहिये जब आप परिश्रम करते हुये खुली प्रतियोगिता में अपना झंडा गाड़ दें, सैकड़ों उदाहरण हैं कि कमजोर अकादमिक स्कोर वाले संघर्षशील साथी मेहनत और प्रतियोगिता के दम पर उच्च पदों पर पदस्थ हैं।उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में स्किल,योग्यता,बौद्धिकता का जो सपना मैंने देखा था कल अवश्य रूप से पूरा हो जायेगा।मैं किसी के विरोध में नही बल्कि गलत सिस्टम के विरोध में खड़ा हूँ,खुली प्रतियोगिता में मेहनत करके नकलची भी यदि चाहें तो अच्छा स्कोर कर सकते हैं किंतु इस तरह अकादमिक प्राप्तांको के निर्दयी और क्रूर पैरों के नीचे मैं बौद्धिकता और ज्ञान को कभी कुचलते हुये नही देख सकता।सरकारों जाग जाओ क्योंकि अब उत्तर प्रदेश का बुद्धिजीबी वर्ग जाग गया है।मैं अपनी ओर से हमारे अग्रज व् वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन शर्मा जी को इस जीत की अग्रिम शुभकामनायें देता हूँ।

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