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Sunday, 27 November 2016

अकेडमिक vs टेट पर हिमांशु राणा का बयान

Himanshu Rana with Amit Singh and Durgesh Pratap Singh in Bangkok, Thailand. >>>>


मिडिल भर्ती पर होने वाले आदेश पर विचारणीय बिंदु :-

1 ) एकल पीठ में 2013 में जब इस भर्ती का विज्ञापन निकला था तब सरकार समस्त संशोधनों को रद्द करके अपने संशोधनों पर नए विज्ञापन विज्ञापन को बचा रही थी लेकिन पूर्ण पीठ का आदेश आ गया था तो एकल पीठ की संभवतः ये प्रार्थना रही होगी :-

*टेट मेरिट बन जाए (इसके चांसेस बहुत ही कम है क्यूंकि एकल पीठ में रिट करने वाला व्यक्ति डीबी में भी ये प्रेयर नहीं किया था वो भारांक की प्रेयर किये थे जबकि आज भी संघर्षत 150 /2013 के मुख्य वादी की रिट पर हुआ जो आजतक जिन्दा है) |

*भारांक दिया जाए जैसा कि उपरोक्त स्पष्ट रूप में बता ही चूका हूँ |

*विज्ञापन रद्द कर दिया जाए |

एकल पीठ का निर्णय मा० न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल जी की बेंच से आया जिन्होंने 15 या 16 , 15,16 , 15 और 16 (जो जैसे पढना चाहे वैसे हांक ले) रद्द कर दिए और ये कहा कि इतनी रिक्तियां हैं भरो |

फिलहाल इसे माना गया टेट मेरिट बन गयी , चलो ठीक है |

2 ) स्पेशल अपील हुई एकल पीठ के निर्णय के विरोध में :-

इसमें दो बातें अगर स्पेशल अपील allow नहीं है तो एकल पीठ के निर्णय पर मुहर लगाकर ख़ारिज किया जाता स्पेशल अपील को और अगर allow की गई हैं तो उस पर सुनवाई होगी पॉइंट टू पॉइंट तभी निर्णय रिज़र्व रखा जाएगा , जैसा कि 72825 में हुआ था , स्पेशल अपील करने वालों को याद होगा |

मेरी भी एक याचिका इसमें लंबित थी 16322/2016 जिसे ख़ारिज किया गया है जिसकी प्रार्थना ये ही थी कि 15 , 16 रद्द है बिना भारांक के भर्ती नहीं हो सकती है और आजतक जितनी भी हुई हैं सभी असंवैधानिक हैं , यानी कि याचिका की प्रेयर और एकल पीठ के निर्णय में समानता है तो फिर अगर याचिका रद्द हुई है तो क्या एकल पीठ का निर्णय रद्द हुआ है , क्या स्पेशल अपील allow हो गई है ?
फिलहाल तो देखने वाली बात आदेश आने पर पता चलेगी परन्तु ये साफ़ है अगर स्पेशल अपील allow हुई होगी तो अब अकादमिक जिनकी 80000 से अधिक भर्तियाँ हो चुकी है और टेट मेरिट पर भर्ती जिनके 60000 से अधिक पद मा० सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर भरे जा चुके हैं आमने सामने रहेंगे और चूंकि अब वाकई मुद्दा लगभग साढ़े चार लाख से अधिक पदों का हो गया है तो संवैधानिक पीठ बने |

भविष्य के गर्त में क्या है ये तो कह नहीं सकते हैं लेकिन अगर संवैधानिक पीठ गठित भी हुई तो question of law क्या होंगे क्यूंकि ललित साहब तो पहले ही खुद advocate general रणजीत कुमार जी से कुबुलवा ही चुके हैं भारांक के लिए लेकिन क्या एनसीटीई द्वारा जो कि शिक्षक रखने के लिए न्यूनतम अहर्ता के मापदंड को तय करती है तो क्या वो शिक्षकों के चयन में भी 9 b को स्टेट पर थोप सकती है ?

फिलहाल तो अब देखने वाली बात एक बार फिर होगी कि जीतेगा कौन जो अभी साल-डेढ़ साल की सैलरी मा० सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर लिए हैं या जो लगभग तीन वर्षों से सैलरी प्राप्त कर रहे हैं फिलहाल इस भीड़ में अब शिक्षा मित्रों का जाना तय है जो कि अब एनसीटीई के भारांक वाले कार्यक्रम में फंसेंगे और उनके अधिवक्ता स्वयं बताएँगे कि lordship हम किस चीज़ का भारांक दें 15 वर्षों का या ????????

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