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Friday, 9 December 2016

हिमांशु रना-: हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे का मतलब यह नही की राज्य शिक्षामित्रों को किसी भी रूप से नियुक्ति प्रदान कऱे

हिमांशु रना-: हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे का मतलब यह नही की राज्य शिक्षामित्रों को किसी भी रूप से नियुक्ति प्रदान कऱे

Himanshu Rana >>> 
नमस्कार मित्रों,
कल शिक्षा मित्रों के विरुद्ध पड़ी याचिका WP (c) 915/2016 Jitendra singh sengar & others Vs State of UP & others का आदेश आ गया है जिसे समझने समझाने के लिए आप स्वयं टेट मोर्चे के न्यायाधीश या यूँ कहें तो ज़्यादा सही है कि जिन्हें अयोग्य बताते हैं आप या अनपढ़ कहते हैं उनकी लेखनी में ख़ौफ़ देख सकते हैं, फिर भी हिंदी में स्पष्ट आदेश है :-
उक्त आदेश में स्टेट के अधिवक्ता के माध्यम से विभाग के सचिव का शपथपत्र सह हलफनामा माँगा गया हैं कि
"स्टे के बावजूद विभाग द्वारा शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर "नियमित रूप" से अथवा संविदा के रूप में नियोजित किया हैं अथवा नहीं?"
साथ ही एक विस्तृत पैरा में स्पष्ट किया हैं कि,
"यद्यपि हमने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे दिया परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि आप(स्टेट) शिक्षामित्रों को किसी भी रूप से 'नियुक्ति' प्रदान करो!"
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कहते हैं बात निकलती है तो दूर तक जाती है पिछले माह भी दिसम्बर का महीना था और तारीख़ भी ये ही थी कुछ बरसाती मेण्डक तब भी पैदा हुए थे और आज पुनः ठंडी के मौसम में पड़ रही ओस उन्हें बरसात जैसी लग रही है और वे नाचना शुरू कर दिए हैं |
मेण्डकों और उनके सरदार की ख़ासियत ये है कि कभी कुछ कर नहीं पाए लेकिन भौकाल पूरा बनाते हैं और फिर निकल लेते हैं, आपको याद होगा इस बार मैंने व टीम के सदस्यों ने स्पष्ट किया था कि हमें कोई मदद नहीं चाहिए क्यूँकि हम नहीं चाहते थे कि किसी के नापाक हस्त हमारे कार्यों में दख़ल दे परंतु कुछ की आदत ही ऐसी है कि "झंडी न सीटी फ़र्ज़ी के टीटी " |
आज मैं उन बेरोज़गारों के रहनुमाओं को अवगत कराना चाहता हूँ कि ये कार्य कुछ बेवक़ूफ़ों के द्वारा ज़बरदस्त ब्रीफ़ कराकर हाई कोर्ट में भी किए गए थे जिन पर आदेश या काउंटर तो दूर की बात डेट लगना तक नसीब नहीं हो रहा है status देखने के लिए एक याचिका संख्या दे रहा हूँ चेक कर ले कि एक वर्ष होने को है पर डेट नहीं लगी और अब लगेगी भी क्या क्यूँकि टेट देकर नियुक्ति का आदेश तो हाई कोर्ट कर ही चुका है जिसका प्रमाण सचिव महोदय के अनुसार आप नौ अप्रेल के शासनादेश में देख सकते हैं, वो याचिका संख्या है :-
Writ A 3966/2016 जिसकी सुनवाई पिछले वर्ष जनवरी में हुई थी और अब तक वो कहाँ है कोई पूछे?
इसके अलावा एक जनहित याचिका भी थी खरिजाधिराज जिस पर समस्त नियुक्तियाँ कर रहे थे वो भी गयी |
साथियों, 
आज एक बात स्पष्ट रूप से रखना चाहता हूँ जो इनके द्वारा ग़लत तरीक़े से प्रचालित भी की जाती है वो मुद्दा है कि हिमांशु तो अपने तीनो साथियों के साथ सिलेक्टेड है लेकिन मैं वहीं इनसे प्रश्न करना चाहता हूँ कि क्या हिमांशु आज भी कसे छोड़ दिया है या जो बात वो याची बनाते वक़्त कहा था कि अंत तक लड़ेंगे और शिक्षा मित्रों को छोड़ेंगे नहीं तभी बीएड टेट उत्तीर्ण की नियुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा उस पर कार्य नहीं कर रहा है?
जबकि खारिजाधिराज के उन्ही साथियों से प्रश्न करना चाहता हूँ कि ऐसा कौन सा दिमाग़ इसने तुम्हें दिया है कि ये ख़ुद तो अमित सिंह की याचिका पर नौकरी कर रहा है और तुम्हें इधर से उधर घुमा रहा है बस क्या तुम्हारे पास अपना दिमाग़ नहीं है कि किस प्रकार तुम्हें अपने लिए काम करना है, बहुत खुले शब्दों में कह रहा हूँ रात को अकेले में बिस्तर पर लेटकर भगवान को याद करते हुए पूछना कि क्या आपकी दिशा दशा ठीक है वरना वर्ष 2015 के चौथे माह से दिसम्बर तक याद करिए हर एक आदेश बीएड के पक्ष में था, हिमांशु टीम हर मुक़ाम को हांसिल की क्यूँकि जज़्बा था लड़ने का आज भी है लेकिन बीएड वालों ने केस में ऐसी भसड कर दी है कि आदेश देने वाला ख़ुद समझ गया है कि इन्हे नौकरी नहीं चाहिए |
कल शिक्षा मित्रों की तरफ़ से दर्जनों अधिवक्ता थे हमारी तरफ़ से दो बस क्या आदेश नहीं मिला हमें?
न्यायमूर्ति ख़ुद ही हँसकर बोले कि विमुद्रिकर्ण का इन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा |
ख़ुद टेट अकादमिक के इतने अधिवक्ता हो जाते हैं तो क्यूँ अपनी ऊर्जा नष्ट कर रहे हो? घर बैठ जाओ जब तक ये रवैया रहेगा तब तक कुछ नहीं होगा, लिख लो और दिमाग़ में बैठा लो आने वाली 22 feb 2017 को एक स्वर्णिम अवसर है पूरे दिन सुनवाई का और उसी और हम अग्रसर हैं धीरे धीरे शिक्षा मित्रों के कॉन्सेप्ट को न्यायमूर्ति के लिए करने को अगर उस दिन शिक्षा मित्रों के विरुद्ध आवाज़ नहीं उठाई तो मामला बहुत लम्बा जाएगा बाक़ी आपकी सोंच क्यूँकि जिस प्रकार 72825 वाले नौकरी कर रहे हैं उसी प्रकार अकादमिक, एडहोक, शिक्षा मित्र नौकरी कर रहे हैं और न्यायपालिका में equity शब्द का ज्ञान ले लो बेहतर रहेगा |
पूरा प्रदेश एकीकरण की बात करता है लेकिन हिमांशु ही अलग चला अपने कारवाँ के साथ पता है क्यूँ उसके परिणाम ये देखो :-
WP (c) 167/2015
IA 2,3/2015
WP (c) 107/2016 
WP (c) 120/2016
slp cc 1621-22/2016
slp 2397-98/2016
WP (c) 915/2016
इसके अलावा सौ से ज़्यादा IA अब तक डाली जा चुकी हैं विभिन्न मुद्दों को लेकर |
बस इतना ही कहूँगा जाग जाओ मेरे विरुद्ध बोलने लिखने से आप टीम के द्वारा किए गए या किए जाने वाले कार्यों पर न हाई तो प्रश्न चिन्ह लगा सकते हैं और न ही हमें रोक सकते हैं बाक़ी चापलूसों की मर्ज़ी |
पोस्ट को सेव कर लो भविष्य में काम आएगी |
हर हर महादेव
धन्यवाद 
हिमांशु राणा

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