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Thursday, 4 May 2017

स्थानांतरण नीति जारी, प्रभावित होंगे कई अधिकारी

स्थानांतरण नीति जारी, प्रभावित होंगे कई अधिकारी

जागरण संवाददाता, एटा: सूबे की नई सरकार की स्थानांतरण नीति का इंतजार मंगलवार को खत्म हो गया। प्रदेश सरकार ने स्थानांतरण नीति जारी कर दी। नीति के अनुसार, जिले के भी कई अधिकारी व कर्मचारी इससे प्रभावित होना तय हैं। 30 जून तक अलग-अलग स्तर पर यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
जिले में कई क और ख श्रेणी के अंतर्गत आने वाले अधिकारी काफी समय से जिले में मौजूद हैं। वहीं कर्मचारियों का भी यही हाल है। पिछली सपा सरकार में आए तमाम अधिकारी, कर्मचारियों को पांच साल या उससे भी ज्यादा का समय हो चुका है। इन हालातों में प्रदेश की सरकार बदलने के बाद से ही अधिकारी, कर्मचारियों में इस बात को बेसब्री थी कि नई सरकार अपनी तबादला नीति में क्या तय करेगी। मंगलवार को स्थानांतरण नीति जारी होने के बाद साफ हो गया है कि कोई भी अधिकारी एक जिले में तीन साल और मंडल में सात वर्ष का कार्यकाल 31 मार्च को पूरा कर चुके हैं उन्हें स्थानांतरित किया जाएगा। अधिकारियों के स्थानांतरण शासन और विभाग स्तर से होंगे।
वहीं जिले में यह प्रक्रिया विभागाध्यक्षों द्वारा की जाएगी। विभागीय कर्मचारियों के लिए भी यह तय किया गया है कि ग समूह के कार्मिक तीन साल से ज्यादा किसी एक पटल पर न रहें। दिव्यांगों अधिकारी, कर्मचारियों को सरकार ने जरूर राहत दी है। उन्हें तबादला नीति से मुक्त रखा गया है। जिले की स्थिति पर गौर करें तो नई स्थानांतरण नीति के दायरे में कई प्रशासनिक, तहसील, परिवहन, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, विकास विभाग के भी कई अधिकारी प्रभावित होंगे। वहीं कार्मिकों को देखा जाए तो लगभग अधिकांशत: विभागों में दर्जनों लिपिक ऐसे हैं जो वर्षों से एक ही पटल पर जमे हुए हैं। नीति जारी होने के बाद अधिकारी, कर्मचारी भी अब तबादला सूचियां आने का इंतजार करने लगे हैं।

तो शायद उन्हें भी मिल जाएगी राहत

सपा शासन में तमाम परिषदीय शिक्षक राजनीति के शिकार रहे हैं। अब तबादला नीति के अंतर्गत उन्हें भी स्थानांतरण की उम्मीद जगी है। कई शिक्षक ऐसे हैं जो पांच साल से भी ज्यादा समय पिछड़े क्षेत्रों में गुजार चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी विभाग ने सुनवाई नहीं की। वहीं तमाम ऐसे हैं जिन्होंने कम शिक्षा वाले क्षेत्रों का अब तक मुंह नहीं देखा है.

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