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Thursday, 18 May 2017

सरकारी संस्थाओं में होगी प्राइवेट जैसी पढ़ाई

सरकारी संस्थाओं में होगी प्राइवेट जैसी पढ़ाई

जितेंद्र उपाध्याय, लखनऊ1यदि आप पॉलीटेक्निक में प्रवेश कर रहे हैं या फिर पढ़ाई कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। प्राविधिक शिक्षा विभाग पुरानी सरकारी पॉलीटेक्निक संस्थाओं के भवनों को न केवल सुधारेगा, बल्कि शिक्षकों को कार्यशालाओं के माध्यम से मांग के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर भी बनाएगा।1सरकारी पॉलीटेक्निक संस्थाओं में प्रवेश के दौरान विद्यार्थियों के अभिभावकों को इसका एहसास हो कि वह एक निजी संस्था में आए हैं और पढ़ाई की गुणवत्ता भी सरकारी के बजाय निजी संस्थाओं की भांति होगी। कम फीस में गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने की प्राविधिक शिक्षा विभाग की पहल के पीछे मंशा यह है कि डिप्लोमा के प्रति विद्यार्थियों का न केवल रुझान बढ़े, बल्कि उन्हें मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी पाने में सहूलियत भी हो। राजधानी के हीवेट पॉलीटेक्निक में तो भवन को दुरुस्त करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। जर्जर भवन को सुधारने के साथ ही प्रयोगशालाओं को भी दुरुस्त किया जा रहा है। राजकीय पॉलीटेक्निक फैजाबाद रोड, राजकीय महिला पॉलीटेक्निक, गोविंद बल्लभ पंत के साथ ही लखनऊ पॉलीटेक्निक में भवनों को सुधारने के साथ ही कक्षाओं को दुरुस्त किया जा रहा है।1आधी से भी कम फीस1सरकारी संस्थाओं में पढ़ाई प्राइवेट संस्थाओं की तर्ज पर होगी, लेकिन फीस प्राइवेट के मुकाबले आधी से भी कम होगी। निजी संस्थाओं की भांति कैंपस प्लेसमेंट को भी बढ़ाने की कवायद चल रही है। राजधानी की सभी संस्थाओं में विद्यार्थियों से कंपनियां ऑनलाइन आवेदन के अनुरूप प्लेसमेंट करने भी लगी हैं। सरकारी संस्थाओं की फीस 11036 रुपये तो सहायता प्राप्त की 17500 है, वहीं निजी संस्थाएं इसके एवज में 35000 लेती हैं। ऐसे कम फीस में गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिलेगी। गुणवत्ता युक्त शिक्षा के साथी रैगिंग रोकने की चुनौती संस्थाओं के सामने मुंह बाए खड़ी है। प्रवेश से पहले संस्थाएं एंटी रैगिंग सेल में वरिष्ठ पॉलीटेक्निक छात्रों को भी शामिल करने पर मंथन कर रही हैं। 1जितेंद्र उपाध्याय, लखनऊ1यदि आप पॉलीटेक्निक में प्रवेश कर रहे हैं या फिर पढ़ाई कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। प्राविधिक शिक्षा विभाग पुरानी सरकारी पॉलीटेक्निक संस्थाओं के भवनों को न केवल सुधारेगा, बल्कि शिक्षकों को कार्यशालाओं के माध्यम से मांग के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर भी बनाएगा।1सरकारी पॉलीटेक्निक संस्थाओं में प्रवेश के दौरान विद्यार्थियों के अभिभावकों को इसका एहसास हो कि वह एक निजी संस्था में आए हैं और पढ़ाई की गुणवत्ता भी सरकारी के बजाय निजी संस्थाओं की भांति होगी। कम फीस में गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने की प्राविधिक शिक्षा विभाग की पहल के पीछे मंशा यह है कि डिप्लोमा के प्रति विद्यार्थियों का न केवल रुझान बढ़े, बल्कि उन्हें मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी पाने में सहूलियत भी हो। राजधानी के हीवेट पॉलीटेक्निक में तो भवन को दुरुस्त करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। जर्जर भवन को सुधारने के साथ ही प्रयोगशालाओं को भी दुरुस्त किया जा रहा है। राजकीय पॉलीटेक्निक फैजाबाद रोड, राजकीय महिला पॉलीटेक्निक, गोविंद बल्लभ पंत के साथ ही लखनऊ पॉलीटेक्निक में भवनों को सुधारने के साथ ही कक्षाओं को दुरुस्त किया जा रहा है।1आधी से भी कम फीस1सरकारी संस्थाओं में पढ़ाई प्राइवेट संस्थाओं की तर्ज पर होगी, लेकिन फीस प्राइवेट के मुकाबले आधी से भी कम होगी। निजी संस्थाओं की भांति कैंपस प्लेसमेंट को भी बढ़ाने की कवायद चल रही है। राजधानी की सभी संस्थाओं में विद्यार्थियों से कंपनियां ऑनलाइन आवेदन के अनुरूप प्लेसमेंट करने भी लगी हैं। सरकारी संस्थाओं की फीस 11036 रुपये तो सहायता प्राप्त की 17500 है, वहीं निजी संस्थाएं इसके एवज में 35000 लेती हैं। ऐसे कम फीस में गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिलेगी। गुणवत्ता युक्त शिक्षा के साथी रैगिंग रोकने की चुनौती संस्थाओं के सामने मुंह बाए खड़ी है। प्रवेश से पहले संस्थाएं एंटी रैगिंग सेल में वरिष्ठ पॉलीटेक्निक छात्रों को भी शामिल करने पर मंथन कर रही हैं। 1पॉलीटेक्निक संस्थाओं को निजी संस्थाओं की तर्ज पर सुधारने का प्रयास चल रहा है। कई राजकीय संस्थाओं में यह कार्य अंतिम चरण में है तो कई संस्थाएं कार्य में लगी हुई हैं। रैगिंग को रोकने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।1कफील अहमद, निदेशक, प्राविधिक शिक्षाहीवेट पालीटेक्निक की इमारत व तैयार आधुनिक कंप्यूटर लैब



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