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Thursday, 6 July 2017

शिक्षकों के निलंबन की विजिलेंस जांच, निलंबन कर मनचाहे स्कूल में दी जाती थी तैनाती, शासन की टेढ़ी नजर

शिक्षकों के निलंबन की विजिलेंस जांच, निलंबन कर मनचाहे स्कूल में दी जाती थी तैनाती, शासन की टेढ़ी नजर


आगरा1बेसिक शिक्षा विभाग में निलंबन दिखा मनचाहे विद्यालय में पोस्टिंग देने के खेल पर शासन की नजर टेढ़ी हो गई है। विजिलेंस अब पिछले पांच साल में हुए ऐसे मामलों की जांच कर रही है। जांच से विभाग में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।
बेसिक शिक्षा विभाग में ट्रांसफर, पोस्टिंग, निलंबन और बहाली के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार होता है। सपा सरकार में ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यापार बन गया था। अधिकारियों ने मनमाने तरीके से शिक्षकों के निलंबन किए और बाद में आवासीय भत्ते वाले ब्लॉक में पोस्टिंग दे दी। सपा सरकार में बिना ट्रांसफर नीति के बड़े स्तर पर यह खेल हुआ। अब सरकार बदलने के बाद इस पूरे खेल की जांच शुरू हो गई है। विजिलेंस ने बेसिक शिक्षाधिकारी से पांच साल के दौरान 90 दिन तक निलंबित रहे शिक्षकों का ब्योरा मांगा है। इन पांच साल में चार बीएसए रहे हैं। विजिलेंस ने विभाग से शिक्षक का नाम, निलंबन के समय उसका तैनाती स्कूल, निलंबन तिथि, बहाली की तिथि और विद्यालय तैनाती का ब्योरा मांगा है।1सजा के रूप में दिए थे एचआरए विद्यालय : पिछले पांच साल में पांच सौ से ज्यादा शिक्षकों को निलंबित किया गए। अधिकांश को बाद में सजा के रूप में आवासीय भत्ता वाले स्कूल में नियुक्ति देकर तोहफा दिया गया। सूत्रों ने बताया कि बिना एचआरए वाले ब्लॉक से एचआरए वाले ब्लॉक में समायोजन करना गलत है। इसके बाद भी जमकर ये काम किया गया।’>>निलंबन कर मनचाहे स्कूल में दी जाती थी तैनाती1’>>सपा शासनकाल में जमकर हुआ था यह खेलपिछले पांच साल में अधिकारियों ने छोटी-छोटी गलतियों पर शिक्षकों को निलंबित किया। इसके बाद नियम विरुद्ध तरीके से उन्हें आवासीय भत्ता वाले ब्लॉक में तैनाती दी गई थी। इस भ्रष्टाचार की जांच जरूरी है।1बृजेश दीक्षित, जिला मंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ1विजिलेंस ने 90 दिन तक निलंबित रहने वाले शिक्षकों की जानकारी मांगी है। सभी खंड शिक्षाधिकारियों से उनके ब्लॉक के शिक्षकों का ब्योरा देने को कहा गया है।1दिनेश यादव, बीएसए आगरा

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