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Friday, 14 July 2017

कृषि शिक्षा की दशा सुधारने को शिक्षकों की होगी भर्ती

कृषि शिक्षा की दशा सुधारने को शिक्षकों की होगी भर्ती

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : विधान सभा में बजट सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को प्रश्न काल में खेती- किसानों को लेकर तनातनी का माहौल बना। कृषि क्षेत्र की बदहाली को लेकर सत्तापक्ष ने पूर्ववर्ती सरकारों पर ठीकरा फोड़ा तो विपक्ष ने वादा खिलाफी जैसे आरोप लगाए। कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए तैयार कार्ययोजना की जानकारी दी और कृषि शिक्षा की दशा सुधारने को शिक्षकों की भर्ती करने की घोषणा की।1सपा के मनोज पांडेय के प्रश्न पर कृषि मंत्री शाही ने कृषि विश्वविद्यालयों की दशा सुधारने के लिए मानकों के अनुसार शिक्षक व अन्य स्टाफ की भर्ती और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। शाही ने स्वीकार किया कि कृषि शिक्षा को लेकर युवाओं का रुझान कम हुआ। विगत पांच वर्ष में 40 प्रतिशत से अधिक गिरावट आ गई है। इसके लिए पूर्ववर्ती सरकारों को कोसते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता किसानों की आय दोगुना करना और कृषि शिक्षा का स्तर बेहतर बनाना है। उन्होंने बताया कि एडमिशन में एनआरआइ कोटा समाप्त करने से भी नुकसान हुआ है।1कृषि आय दोगुना करने के आठ बिंदु : कृषिमंत्री शाही ने सपा के नितिन अग्रवाल के सवाल पर किसानों की आय को दोगुना करने के आठ बिंदु गिनाए। उन्होंने बताया कि रेनफेड क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा विस्तार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड का शतप्रतिशत किसानों में वितरण, उपज के बाद नुकसान घटाना, खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहन, किसानों के उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना, फसल बीमा, खेती के साथ मत्स्य व पशुपालन जैसे व्यवसाय अपनाने पर जोर और कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जाएगा। सपा के सदस्य कृषि मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं थे। नरेंद्र वर्मा व संग्राम सिंह ने किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू कर्जा माफी के मुद्दे को उठाने की कोशिश तो सत्तापक्ष की ओर से शोरशराबा शुरू हो गया। कई मंत्रियों सुरेश राणा, उपेंद्र तिवारी व स्वामी प्रसाद मौर्य ने सरकार का बचाव करते हुए सपा-बसपा को कठघरे में खड़ा किया।बसपा के लालजी वर्मा ने किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान किसानों से किया वादा पूरा नहीं किया। न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने में फसल लागत की अनदेखी करने की आरोप भी लगाया। भाजपा के पंकज सिंह ने बीज सब्सिडी जारी रखने का सवाल उठाया तो अपना दल के आरके वर्मा ने कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के नीति के बारे में सवाल पूछा।

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