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Sunday, 11 February 2018

इनकम टैक्स बचाने के 8 टिप्स

इनकम टैक्स बचाने के 8 टिप्स

इकनॉमिक टाइम्स (हिंदी) | Updated Jan 7, 2011, 12:15 PM IST

इनकम टैक्स एक्ट-1961 में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे आम करदाताओं को फायदा हो सकता है, बशर्ते उन्हें इन प्रावधानों की जानकारी हो। इन्हीं प्रावधानों के बारे में विवेक कौल और ख्याति धरमसी ने कई टैक्स एक्सपर्ट से बातचीत की। यहां पर हम 8 ऐसे विकल्प दे रहे हैं, जिनके जरिए आप कर देनदारी के मोर्चे पर बचत कर सकते हैं।

1. शेयर में हुए नुकसान से लें टैक्स में राहत

क्या आप शेयर में निवेश पर हुए शॉर्ट टर्म नुकसान का फायदा उठा सकते हैं? हां, आयकर कानून तो यही कहता है। अगर आपने प्रॉपर्टी, सोना या डेट फंड से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हासिल किया है, तो आप उसे शेयर से हुए शॉर्ट टर्म कैपिटल नुकसान में समायोजित कर सकते हैं। इससे आप पर टैक्स की देनदारी घट जाती है। मुंबई की टैक्स प्लानिंग और फाइनैंशियल कंसल्टेंसी वंडरलैंड कंसल्टेंट्स के डायरेक्टर संदीप शानबाग का कहना है, 'शॉर्ट टर्म कैपिटल नुकसान को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स से समायोजित कर सकते हैं।'

2. एचआरए नहीं होने के बावजूद आप किराए पर टैक्स छूट ले सकते हैं

कुल घरेलू खर्च में मकान का किराया 40-50 फीसदी तक हो सकता है। यही वजह है कि एक सीमा तक ही एचआरए पर टैक्स छूट दी जाती है, लेकिन अगर आपके वेतन में एचआरए कंपोनेंट नहीं है या आप कारोबारी हैं या स्वरोजगार कर रहे हैं, तब क्या करेंगे? आयकर की धारा 80जीजी के तहत वेतन में एचआरए नहीं होने के बावजूद आप किराए के भुगतान पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंट मेहुल सेठ का कहना है, 'इस छूट के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है।' हालांकि, इसके लिए नियम कुछ अलग हैं। किराए के भुगतान में से कुल आमदनी का 10 फीसदी घटाकर या 2,000 रुपए प्रति महीना या कुल आय के 25 फीसदी पर ही कर छूट का लाभ लिया जा सकता है। इनमें से जो सबसे कम हो, उसी पर डिडक्शन का क्लेम किया जा सकता है। इसके अलावा, करदाता और उसके पति/पत्नी या नाबालिग बच्चे के नाम पर उस शहर में मकान नहीं होना चाहिए।

अगर आप अपने माता-पिता के मकान में रह रहे हैं, तो आप उन्हें किराया दे सकते हैं। अगर आपके माता-पिता की आय का कोई दूसरा स्त्रोत नहीं हो या वे कम कर चुकाते हों, तो आपकी कर देनदारी काफी घट सकती है। हालांकि, 30 फीसदी स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद यह किराया माता-पिता की कर योग्य आमदनी माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि आप सीनियर सिटिजन को सालाना 3.43 लाख रुपए तक भुगतान कर सकते हैं।

3. अगर आप पर निर्भर व्यक्ति बीमार है, तो आप कम टैक्स चुकाएं

आयकर कानून में ऐसे व्यक्ति को 40,000 रुपए तक के डिडक्शन का क्लेम करने की सुविधा दी गई है, जिस पर निर्भर कोई व्यक्ति धारा 80डीडीबी के तहत दर्ज किसी बीमारी से पीडि़त हो। चार्टर्ड एकाउंटेंट पारस सावला का कहना है, 'अगर बीमार व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में आते हैं, तब आप 60,000 रुपए तक की रकम पर छूट का दावा कर सकते हैं।' जिन बीमारियों के लिए छूट दी जाती है, उसमें न्यूरोलॉजिक बीमारी से लेकर कई दूसरी गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया है। इसमें आप पति या पत्नी, बच्चे, माता-पिता और भाई-बहन के इलाज पर यह छूट ले सकते हैं।

4. राजनीतिक दलों को चंदा देकर टैक्स छूट लें

क्या आप किसी राजनीतिक झुकाव की वजह से कर छूट लेना चाहते हैं? अगर आपका जवाब हां में है, तो आप आयकर की धारा 80जीजीसी (कंपनियों के लिए 80जीजीबी) के तहत राजनीतिक पार्टी को दिए गए चंदे पर छूट ले सकते हैं। सेठ कहते हैं, 'इस छूट को अप्रैल, 2010 में लागू किया गया है। यह डोनेशन आप चुनाव कराने वाले इलेक्टोरल ट्रस्ट को भी दे सकते हैं।' दूसरे सभी तरह के विकल्पों में एक सीमा तय है, लेकिन इस छूट के लिए किसी तरह की सीमा तय नहीं की गई है। इस छूट का दावा आप तभी कर सकते हैं, जब आपका डोनेशन पाटीर् खाते में जाए। अगर आप किसी व्यक्ति को नकद देते हैं, तब आप छूट के भागीदार नहीं होंगे। आप किसी चैरिटेबल संस्था को डोनेशन देकर आयकर की धारा 80जी के तहत 50 से 100 फीसदी तक छूट का दावा कर सकते हैं।

5. एजुकेशन लोन पर मिलती है कर छूट

एजुकेशन लोन पर चुकाया जाने वाला ब्याज आयकर कानून की धारा 80ई के तहत कर योग्य आमदनी से घटाया जा सकता है। कुछ साल पहले तक सिर्फ एजुकेशन लोन लेने वाले को कर छूट दी जाती थी, लेकिन अब माता-पिता या पति-पत्नी भी कर छूट का लाभ ले सकते हैं। अब आप वोकेशनल पाठ्यक्रम के लिए भी कर्ज ले सकते हैं। शानबाग कहते हैं, 'अगर आपके माता-पिता या कानूनी अभिभावक ने कर्ज लिया है, तो वे 8 सालों तक (ब्याज चुकाने के पहले साल से इस अवधि को जोड़ें) कर्ज के ब्याज पर छूट का दावा कर सकते हैं।' हालांकि, किसी अन्य रिश्तेदार के लिए लिये गए एजुकेशन लोन पर इस छूट का दावा नहीं किया जा सकता है। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि पंजीकृत वित्तीय संस्थान से ही कर्ज लें।

6. विकलांगता पर मिलती है कर छूट

विकलांग करदाता आयकर की धारा 80यू के तहत 75,000 रुपए तक कर छूट का दावा कर सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति पर निर्भर व्यक्ति इस श्रेणी में आता है, तो आयकर की धारा 80डीडी के तहत छूट का दावा किया जा सकता है। विकलांगता में अंधापन, कम दिखाई देना, लेप्रोसी, बहरापन, लोको-मोटर डिसेबिलिटी और मानसिक विकलांगता को शामिल किया गया है। कर छूट का दावा आप तभी कर सकते हैं जब कम से कम 40 फीसदी विकलांगता हो। अगर विकलांगता 80 फीसदी या उससे अधिक हो तो आप साल में 1 लाख रुपए की रकम पर कर छूट का दावा कर सकते हैं। निर्भर व्यक्ति में करदाता पति या पत्नी, बच्चे, माता-पिता और भाई-बहन को शामिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको सरकारी अस्पताल के सिविल सर्जन या मुख्य चिकित्सा अधिकारी से विकलांगता सटिर्फिकेट हासिल करना होगा।

7. सेकेंड होम पर लें ढेरों कर छूट

आयकर कानून की धारा 24 बी के तहत करदाता होम लोन पर चुकाई जाने वाली 1.5 लाख रुपए तक ब्याज की रकम पर छूट का दावा कर सकते हैं। अगर कोई करदाता दूसरा घर खरीदता है और उसे किराए पर दे देता है, तब होम लोन पर सालभर में चुकाए जाने वाले पूरे ब्याज पर कर छूट का दावा कर सकते हैं। सावला कहते हैं, 'अगर आपके पास एक से अधिक मकान हैं और एक को आपने किराए पर दिया हुआ है, तो होम लोन पर लगने वाले पूरे ब्याज पर कर छूट का दावा किया जा सकता है। हालांकि, किराए से हासिल रकम पर टैक्स का भुगतान करना होगा।'

8. एचआरए के साथ होम लोन का भी लें लाभ

इससे कई लोग आश्चर्य में पड़ सकते हैं, लेकिन आप एचआरए छूट के साथ होम लोन के ब्याज के भुगतान पर कर छूट का दावा कर सकते हैं। कई संस्थान कर्मचारियों को दोनों लाभ लेने की इजाजत नहीं देते हैं। उनका तर्क होता है कि अगर कोई कर्मचारी किराया दे रहा हो, तभी एचआरए पर छूट का दावा कर सकता है और होम लोन पर लाभ तभी ले सकता है, जब वह उसमें खुद रह रहा हो। वे कहते हैं कि आप दोनों काम एकसाथ नहीं कर सकते हैं। पर शानबाग कहते हैं, 'कानूनी तौर पर देखें तो इसमें मौन स्वीकृति है। कानून में इसे साफ तौर पर मना नहीं किया गया है। इससे साफ है कि आपको इसकी इजाजत है।' 

एचआरए और होम लोन पर ब्याज, दो अलग-अलग प्रावधान हैं और एक पर छूट का दावा करने से दूसरे पर असर नहीं पड़ता है। शानबाग कहते हैं, 'करदाता कितनी भी संख्या में मकान रख सकते हैं। यह एक ही शहर में हो सकता है या भारत या विदेश में कहीं भी हो सकता है, लेकिन ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि आप एचआरए छूट नहीं ले सकते हैं।' शानबाग कहते हैं, 'इसी तरह से आप धारा 80 सी और 80 डी (मेडिकल इंश्योरेंस) के तहत कर छूट का दावा करते हैं। लगभग सभी लोग इन दोनों धाराओं से कर छूट का दावा करते हैं।'

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