Basic Ka Teacher.Com Welcomes you….बेसिक का टीचर. कॉम में आपका स्वागत है

Translate

Sunday, 22 May 2022

इंचार्ज प्रधानाध्यापक को प्रधानाध्यापक का वेतन दिया जाना चाहिए..

इंचार्ज प्रधानाध्यापक को प्रधानाध्यापक का वेतन दिया जाना चाहिए..

देखें कोर्ट का आदेश..



HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

?Court No. - 32

Case :- WRIT - A No. - 19243 of 2021

Petitioner :- Bhoop Singh
Respondent :- State Of U.P. And 4 Others
Counsel for Petitioner :- Raghvendra Pratap Singh,Man Bahadur Singh
Counsel for Respondent :- C.S.C.

Hon'ble Siddharth,J.
Despite time granted to the learned Standing Counsel to file counter affidavit by orders dated 25.2.2022 and 18.4.2022, no counter affidavit has been filed.
Petitioner has approached this court with the grievance that he has retired from the post of Officiating Principal of the institution but he is being paid pension on the basis of salary drawn by him as lecturer.
Learned counsel for the petitioner has relied upon the judgement in Surendra Prasad Agnihotri Vs. State of Uttar Pradesh, Laws (All) 2010, 1 80, Surendra Prasad Agnihotri Vs. State of Uttar Pradesh, Laws (All), 2010, 5 1 and Pushkar Singh Verma Vs. District Inspector of Schools, Meerut, Laws (All) 1999 78, wherein it has been held that officiating principal� shall be entitled to pension on basis of salary of the principal.�
The respondents are directed to recalculate the pension on the basis of working of petitioner as Officiating Principal� and make payment of arrears of pension and revised pension from month to month within six weeks from today.
In case the order is not complied within time, the petitioner shall� entitled to be paid 12% interest on the amounts from the respondents.
The State Government shall be free to recover the amount of interest paid to the petitioner from public servant/servants found responsible for the delay in compliance of this order.
The writ petition stands allowed.
Order Date :- 19.5.2022
Atul kr. sri.

 याचिकाकर्ता ने इस शिकायत के साथ इस अदालत का दरवाजा खटखटाया है कि वह संस्था के कार्यवाहक प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हो गया है लेकिन उसे व्याख्याता के रूप में उसके द्वारा प्राप्त वेतन के आधार पर पेंशन का भुगतान किया जा रहा है।
 याचिकाकर्ता के विद्वान वकील ने सुरेंद्र प्रसाद अग्निहोत्री बनाम मामले में फैसले पर भरोसा किया है।  

*उत्तर प्रदेश राज्य, कानून (सभी) 2010, 1 80, सुरेंद्र प्रसाद अग्निहोत्री बनाम।  उत्तर प्रदेश राज्य, कानून (सभी), 2010, 5 1 और पुष्कर सिंह वर्मा बनाम।*  *जिला विद्यालय निरीक्षक, मेरठ, कानून (सभी) 1999 78, जिसमें यह माना गया है कि स्थानापन्न प्राचार्य प्रधानाध्यापक के वेतन के आधार पर पेंशन के हकदार होंगे।*
 *प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे याचिकाकर्ता के स्थानापन्न प्राचार्य के रूप में काम करने के आधार पर पेंशन की पुनर्गणना करें और आज से छह सप्ताह के भीतर महीने-दर-महीने पेंशन और संशोधित पेंशन के बकाया का भुगतान करें।*
 *यदि आदेश का समय के भीतर अनुपालन नहीं किया जाता है, तो याचिकाकर्ता प्रतिवादी से राशि पर 12% ब्याज का भुगतान करने का हकदार होगा।*

*राज्य सरकार इस आदेश के अनुपालन में विलम्ब के लिए उत्तरदायी लोक सेवकों/सेवकों से याचिकाकर्ता को भुगतान की गई ब्याज की राशि वसूल करने के लिए स्वतंत्र होगी।*

@Exclusive🚩

No comments:

Post a Comment