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Saturday, 22 April 2017

नई सरकार ने शुरू किए प्रयास, तेजी से होगी डॉक्टरों की : स्वास्थ्य मंत्री1

ओपीडी में शाम को भी मुफ्त इलाज

नई सरकार ने शुरू किए प्रयास, तेजी से होगी डॉक्टरों की : स्वास्थ्य मंत्री1

भर्ती

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश की नई सरकार अपने प्रयास में सफल हो पाई तो नागरिकों को जल्द ही शाम को भी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में विशेषज्ञों से परामर्श मिल सकेगा। चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के मुताबिक इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि शाम की ओपीडी के कारण दोगुने काम के बोझ से आशंकित सरकारी डॉक्टरों का कहना है कि सरकार को पूरा आकलन करने के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए। 1सरकारी अस्पतालों में शाम को भी ओपीडी चलाने की कोशिश पिछली सपा सरकार में भी हुई थी। 2014 में किया गया यह प्रयोग डॉक्टरों की कमी की वजह से महज दो-तीन हफ्तों में ही विफल हो गया था। इस बार भी सरकार की चुनौती यही है। दरअसल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कुल करीब 14 हजार डॉक्टरों की जरूरत है, जबकि उपलब्धता आठ हजार एमबीबीएस डॉक्टरों के अलावा करीब 3600 विशेषज्ञों की ही है। इसमें भी एमडी मेडिसिन स्तर के फिजीशियन और सर्जन की संख्या मिलाकर कुल करीब 550 के आसपास ही है। हालत यह है कि लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा, मेरठ, बरेली और कानपुर जैसे मंडल अस्पतालों वाले बड़े शहरों को छोड़कर बाकी जगहों पर दो-दो फिजीशियन और सर्जन भी नहीं हैं। 1स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह कहते हैं कि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और लोगों को अधिक सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शाम को ओपीडी संचालित करने के लिए डॉक्टरों की की जाएगी। दूसरी तरफ उप्र पीएमएस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.अशोक यादव का मानना है कि सिर्फ शाम को ओपीडी लगाने या ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा बढ़ाने से भी हालात तब तक नहीं बदलेंगे, जब तक कि स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण बेहतर तक निजी चिकित्सा क्षेत्र की गड़बड़ियों पर रोक लगाने के इंतजाम न किए जाएं। डॉ. यादव बताते हैं कि ओपीडी में आने वालों में से ज्यादातर या तो झोलाछाप डॉक्टरों के शिकार हैं या निजी क्षेत्र ने उनका केस बिगाड़ा होता है, इसलिए पहली जरूरत उधर शिकंजा कसने की है, जिससे मरीज अपने आप घट जाएंगे। 1राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश की नई सरकार अपने प्रयास में सफल हो पाई तो नागरिकों को जल्द ही शाम को भी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में विशेषज्ञों से परामर्श मिल सकेगा। चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के मुताबिक इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि शाम की ओपीडी के कारण दोगुने काम के बोझ से आशंकित सरकारी डॉक्टरों का कहना है कि सरकार को पूरा आकलन करने के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए। 1सरकारी अस्पतालों में शाम को भी ओपीडी चलाने की कोशिश पिछली सपा सरकार में भी हुई थी। 2014 में किया गया यह प्रयोग डॉक्टरों की कमी की वजह से महज दो-तीन हफ्तों में ही विफल हो गया था। इस बार भी सरकार की चुनौती यही है। दरअसल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कुल करीब 14 हजार डॉक्टरों की जरूरत है, जबकि उपलब्धता आठ हजार एमबीबीएस डॉक्टरों के अलावा करीब 3600 विशेषज्ञों की ही है। इसमें भी एमडी मेडिसिन स्तर के फिजीशियन और सर्जन की संख्या मिलाकर कुल करीब 550 के आसपास ही है। हालत यह है कि लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा, मेरठ, बरेली और कानपुर जैसे मंडल अस्पतालों वाले बड़े शहरों को छोड़कर बाकी जगहों पर दो-दो फिजीशियन और सर्जन भी नहीं हैं। 1स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह कहते हैं कि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और लोगों को अधिक सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शाम को ओपीडी संचालित करने के लिए डॉक्टरों की की जाएगी। दूसरी तरफ उप्र पीएमएस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.अशोक यादव का मानना है कि सिर्फ शाम को ओपीडी लगाने या ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा बढ़ाने से भी हालात तब तक नहीं बदलेंगे, जब तक कि स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण बेहतर तक निजी चिकित्सा क्षेत्र की गड़बड़ियों पर रोक लगाने के इंतजाम न किए जाएं। डॉ. यादव बताते हैं कि ओपीडी में आने वालों में से ज्यादातर या तो झोलाछाप डॉक्टरों के शिकार हैं या निजी क्षेत्र ने उनका केस बिगाड़ा होता है, इसलिए पहली जरूरत उधर शिकंजा कसने की है, जिससे मरीज अपने आप घट जाएंगे।

‘भवन, उपकरण या पैरा मेडिकल स्टाफ की दिक्कत नहीं है, असल कमी विशेषज्ञ डॉक्टरों की है। नई करने के साथ ही एम्स व अन्य बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों को भी यहां लाकर यह कमी दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।’1सिद्धार्थनाथ सिंह, चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री1

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