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Wednesday, 31 May 2017

अफसर खुद बताएं कहां चाहते हैं तैनाती, ताश की पत्तों की तरह नहीं फेंटे जाएंगे शिक्षा महकमे के अफसर

अफसर खुद बताएं कहां चाहते हैं तैनाती, ताश की पत्तों की तरह नहीं फेंटे जाएंगे शिक्षा महकमे के अफसर

इलाहाबाद : प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की तरह शिक्षा महकमे के अफसर ताश की पत्तों की तरह नहीं फेंटे जाएंगे, बल्कि उन्हें मनचाहे जिले और जगह पर तैनाती देने की तैयारी है। यह जरूर है कि वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत जिला और मंडल के अफसरों को इधर से उधर जाना पड़ेगा। महकमे ने समूह ‘क’ के अफसरों से मनचाहे जिले में जाने का तीन विकल्प मांगा है। 


प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा महकमे में बदलाव होने जा रहा है। अभी तक यूपी बोर्ड की परीक्षा, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन व रिजल्ट तैयार कराने में सभी व्यस्त रहे हैं। नया सत्र जुलाई से शुरू होना है इसलिए जून में ही अफसरों को इधर से उधर किया जाएगा। कुछ दिन पहले शिक्षा निदेशालय में अफसरों का पूरा ब्योरा कंप्यूटराइज्ड किया गया है। निदेशालय, जिला व मंडलों पर तैनात अफसरों ने अपनी तैनाती का पूरा विवरण पत्रक में भरकर निदेशालय में जमा किया है। इसमें हर अफसर ने सेवा शुरू होने से लेकर अब तक कब और कहां तैनात रहा है इसका पूरा ब्योरा दिया है।


इससे सूबे की सरकार को यह भी पता चला है कि सपा या फिर बसपा शासनकाल में किन अफसरों को मलाईदार जगहों पर तैनाती मिली थी। कौन से ऐसे अफसर हैं जो दोनों सरकारों के चहेते रहे हैं और वह कौन अधिकारी हैं जो लगातार हाशिये पर रखे गए। साथ ही अफसरों की सेवा विवरणिका से जवाबदेही तय करने में भी सहूलियत मिली है। माध्यमिक शिक्षा के निदेशक अमरनाथ वर्मा ने बीते सप्ताह प्रदेश के मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी) को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि शासन की वार्षिक स्थानांतरण के तहत फेरबदल होना है। इसलिए समूह ‘क’ के अफसरों से तीन जिलों का विकल्प लेकर उन्हंे ई-मेल के जरिये भेजा जाए, ताकि अफसरों को मनचाही तैनाती मिल सके।

⚫ 120 अफसरों पर अनुशासनिक कार्रवाई
माध्यमिक शिक्षा महकमे में ‘क’ समूह के अफसरों की भरमार है। जिला विद्यालय निरीक्षक से लेकर संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर तक के अफसर इस श्रेणी में आते हैं। इनमें से करीब 120 अफसर ऐसे हैं जिन पर अनुशासनिक कार्रवाई लंबित है। ऐसे अफसरों को दायित्व मिलने की उम्मीद बहुत कम है। हालांकि तीन जिलों का विकल्प सभी का भेजा जा रहा है।

Sunday, 28 May 2017

जानिए फिटमेंट गुणांक 2.57 के आधार पर अपना 7वें वेतन आयोग से वेतन

जानिए फिटमेंट गुणांक 2.57 के आधार पर अपना 7वें वेतन आयोग से वेतन

Saturday, 27 May 2017

शिक्षा मित्रों के पक्ष में निर्णय आने के संभावित कारण,दुर्गेश प्रताप सिंह के अनुसार

शिक्षा मित्रों के पक्ष में निर्णय आने के संभावित कारण,दुर्गेश प्रताप सिंह के अनुसार

(सोशल मीडिया से साभार)

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{बेसिक का टीचर}

पहली बार राणा के दाहिने हाथ दुर्गेश ने दिखाई सच लिखने की हिम्मत और इसी पोस्ट में छिपा है शिक्षामित्रो की जीत का रहस्य✔💪

ये रही दुर्गेश प्रताप की पोस्ट ----👇

NCTE ACT & RTE ACT: एक नजर

1. वर्ष १९९३ में संसद द्वारा NCTE एक्ट पारित किया गया, जो 1 जुलाई 1995 से लागू हुवा! एक्ट का मुख्य उद्देश्य इसके प्रस्तावना से स्पष्ट होता हैं, जिसमें अंकित हैं कि, इस परिषद् (काउन्सिल) की स्थापना "शिक्षक प्रशिक्षण को मानिटर और रेगुलेट" करने के लिए की गयी हैं! इसके साथ ही साथ एक्ट के सेक्शन 12(D) में "स्कूलों अथवा संस्थानों" में शिक्षक नियुक्ति हेतु न्यूनतम शैक्षिक अर्हता निर्धारित करते हुए "गाइडलाइन" जारी करने का प्राविधान किया गया!

2. वर्ष 2001 में प्रथम बार NCTE ने स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति हेतु न्यूनतम शैक्षिक अर्हता निर्धारित करते हुए "रेगुलेशन" प्रकाशित किया!

3. वर्ष 2008 में सुप्रीमकोर्ट में जस्टिस काटजू की अध्यक्षता वाली द्विसदस्यीय पीठ ने NCTE ACT-१९९३ के सेक्शन 12(D) में अंकित "स्कूल अथवा संस्था" शब्द को, NCTE ACT-१९९३ के सेक्शन 2(2) में परिभाषित "संस्था" शब्द के आधार पर बताया कि एक्ट में संस्था का मतलब "शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान से हैं न कि प्राथमिक स्कूलों से हैं, अतः 12(D) के तहत सिर्फ शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षक नियुक्ति हेतु न्यूनतम शैक्षिक अर्हता निर्धारित की जा सकती हैं न कि प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों हेतु! उक्त आदेश को सुप्रीमकोर्ट के ही ट्रिपल बेंच में ले जाया गया, और केस के पेंडिंग रहने के दौरान ही 12 अक्टूबर २०११ को NCTE एक्ट-2011 में संशोधन पारित कर सेक्शन 12(A) जोड़ा गया! जिसके माध्यम से NCTE को प्राथमिक विद्यालयों से लेकर इंटरमीडिएट विद्यालयों तक के शिक्षकों की नियुक्ति हेतु न्यूनतम शैक्षिक अर्हता निर्धारित करते हुए "रेगुलेशन और गाइडलाइन" जारी करने का वैधानिक अधिकार प्रदान किया गया! साथ ही साथ अभी तक सरकारी आदेश, नियमावली से "नियुक्त शिक्षकों" को आगे से निर्धारित होने वाले "न्यूनतम अर्हता" धारण करने से छूट प्रदान की हैं!
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4. दि० 26 अगस्त २००९ को RTE ACT को प्रकाशित किया गया, जिसे 1 अप्रैल 2010 से लागू होना था! एक्ट के सेक्शन 23(1) सेंट्रल गवर्नमेंट को शक्तिप्रदान करती हैं कि वो "नोटिफिकेशन" के द्वारा शिक्षक नियुक्ति हेतु "न्यूनतम अर्हता" निर्धारक "एकेडेमिक अथॉरिटी" प्राधिकृत करेगी! साथ ही साथ एक्ट के सेक्शन 38(3) के अनुसार सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा जारी सभी "नोटिफिकेशन" को जल्द से जल्द इसे संसद के दोनों सदनों के सामने रखकर एप्प्रोव कराएगी, विशेषकर सेक्शन 20 और सेक्शन २३ के तहत जारी नोटिफिकेशन को!

5. दि० 31 मार्च 2010 को, सेंट्रल गवर्नमेंट ने सेक्शन 23(1) के तहत नोटिफिकेशन इशू कर NCTE को एकेडेमिक ऑथरिटी का दर्जा दिया!

6. दि० 23 अगस्त 2010, NCTE (जिसे अब शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को रेगुलेट करने के साथ ही साथ RTE एक्ट के सेक्शन 23(1) के तहत एकेडेमिक अथॉरिटी का दर्जा मिल चुका हैं) ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति हेतु "न्यूनतम अर्हता" का प्रथम नोटिफिकेशन जारी किया! जिसे 29 जुलाई २०११ को संशोधित किया गया!

7. २३ अगस्त के नोटिफिकेशन में TET का प्राविधान किया गया, जिसे 11 फरवरी २०११ को, NCTE ने गाइडलाइन इशू कर, TET की विस्तृत व्याख्या की! साथ ही साथ गाइडलाइन के पैरा 9 में (a) टेट मिनिमम क्वालीफाइंग मार्क  60%(रिजर्व के लिए छूट, स्टेट जितना चाहे), (b) भर्ती प्रक्रिया में टेट अंकों के भारांक की बात अंकित की!
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मुख्य विवादित बिंदु :-
A. (शिक्षामित्रों के संदर्भ में तर्क)-
१. RTE एक्ट 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी होना था, फिर उससे एक दिन पूर्व ही सेंट्रल गवर्नमेंट एक्ट के सेक्शन(23) का उपयोग किस प्रकार कर ली?

२. 31 मार्च 2010 को जारी यह नोटिफिकेशन, एक्ट के ही सेक्शन 38(3) के अनुसार न तो निर्धारित टाइम पीरियड में और न ही आज तक संसद के दोनों सदनों के समक्ष नहीं रखा गया, अर्थात यह नोटिफिकेशन ही सेक्शन 38(3) के अनुसार अवैध कहा जा सकता हैं, और यदि यह अवैध माना गया तो फिर 23 अगस्त 2010 नोटिफिकेशन व् 11 फरवरी २०११ गाइडलाइन भी अवैध होगा!)

३. NCTE (AMENDMENT) ACT-2011 के सेक्शन 12(A) के तहत इस अमेंडमेंट से पहले सरकारी आदेश, नियमावली से नियुक्त शिक्षकों को आगे से निर्धारित शैक्षिक अर्हता धारण करने से छूट प्रदान की गयी हैं! शिक्षामित्रों का दावा हैं कि वो सरकारी आदेश दि० 26 मई 1999 व 1 जुलाई 2001 से नियुक्त पैरा शिक्षक हैं!

B. (15वें व 16वें संशोधन से हुयी भर्तियों के संदर्भ में तर्क )-
१. उपरोक्त दोनों बिंदु (यद्यपि अभी तक चेलेंज नहीं)

२. RTE एक्ट के सेक्शन 23(1) के तहत NCTE को मिनिमम क्वालिफिकेशन निर्धारित करने का प्रभार मिला था, फिर NCTE का 11 फरवरी २०११ वाले गाइडलाइन का पैरा 9(B) [SHOULD GIVE WEIGHTAGE OF TET SCORE IN RECRUITMENT PROCESS], राज्य के "चयन नियम निर्धारण करने के अधिकार" में हस्तक्षेप कैसे कर सकता हैं? क्या NCTE को यह अधिकार प्राप्त हैं अथवा नहीं? यद्यपि यह गाइडलाइन यदि केंद्र द्वारा जारी किया जाता तो राज्य के लिए बाध्यकारी होता!
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NCTE पक्ष:- NCTE फ़िलहाल असहज स्थिति में हैं, कुछ कमियों के कारण  किसी भी बिंदु पर स्पस्ट बोलने में असहज महसूस कर रही हैं!
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परिणाम:- मा० सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की प्रतीक्षा करें! धन्यवाद्
_____आपका दुर्गेश प्रताप सिंह

राजकीय महाविद्यालयों में लागू होगा ड्रेस कोड

राजकीय महाविद्यालयों में लागू होगा ड्रेस कोड


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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू होगा। महाविद्यालयों की गैलरियों में परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र भी लगेंगे। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने शुक्रवार को राजधानी के डॉ.राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत आयोजित कार्यशाला में यह घोषणाएं कीं। 1यह कार्यशाला राजकीय महाविद्यालयों में आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और प्राचार्यों की कार्यक्षमता बढ़ाने के मकसद से आयोजित की गई थी। उप मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा संजय अग्रवाल को राजकीय महाविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू करने और महाविद्यालयों की गैलरियों में परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाने के बारे में आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाये जाने से छात्र यह जान सकेंगे कि राष्ट्र की सुरक्षा में इन सैनिकों का क्या योगदान रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उच्च शिक्षा को जन सामान्य के लिए सर्वसुलभ बनाना और गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने और उपलब्ध सुविधाओं का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने पर जोर दिया। कहा कि इसके लिए रूसा के जरिये विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रूसा के तहत 84 राजकीय महाविद्यालयों की कार्ययोजना को केंद्र सरकार मंजूरी दे चुकी है जिसमें प्रति महाविद्यालय को दो करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है।राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू होगा। महाविद्यालयों की गैलरियों में परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र भी लगेंगे। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने शुक्रवार को राजधानी के डॉ.राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत आयोजित कार्यशाला में यह घोषणाएं कीं। 1यह कार्यशाला राजकीय महाविद्यालयों में आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और प्राचार्यों की कार्यक्षमता बढ़ाने के मकसद से आयोजित की गई थी। उप मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा संजय अग्रवाल को राजकीय महाविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू करने और महाविद्यालयों की गैलरियों में परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाने के बारे में आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाये जाने से छात्र यह जान सकेंगे कि राष्ट्र की सुरक्षा में इन सैनिकों का क्या योगदान रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उच्च शिक्षा को जन सामान्य के लिए सर्वसुलभ बनाना और गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने और उपलब्ध सुविधाओं का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने पर जोर दिया। कहा कि इसके लिए रूसा के जरिये विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रूसा के तहत 84 राजकीय महाविद्यालयों की कार्ययोजना को केंद्र सरकार मंजूरी दे चुकी है जिसमें प्रति महाविद्यालय को दो करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है।

पुरस्कृत शिक्षक मुफ्त में करेंगे सैर-सपाटा

पुरस्कृत शिक्षक मुफ्त में करेंगे सैर-सपाटा

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एटा: राष्ट्रपति व राज्यपाल पुरस्कार पा चुके शिक्षकों पर सरकार मेहरबान है। राज्य सड़क परिवहन निगम ने इनको निश्शुल्क यात्र की सुविधा देने का एलान किया है। अब ऐसे शिक्षक मुफ्त में सैर सपाटा करेंगे।1सुविधा के लाभ के लिए इन शिक्षकों के स्मार्ट कार्ड बनाए जाएंगे। आवेदन के 45 दिन के अंदर स्मार्ट कार्ड बनाकर दे दिए जाएंगे। इसके बाद वे प्रदेश में कहीं पर भी रोडवेज बस में निश्शुल्क यात्र कर सकेंगे। स्मार्ट कार्ड की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शिक्षकों से आवेदन भरवाए जा रहे हैं। आवेदन के साथ उनका फोटो पहचान पत्र, पुरस्कार प्रमाण पत्र, दो फोटो और मोबाइल नंबर भी लिया गया है। इसके बाद स्मार्ट कार्ड के नंबर को ईटीएम में फीड किया जाएगा, जिससे जानकारी मिल सके कि कार्ड एक्टिव है या नहीं। परिचालक के पास भी रिकॉर्ड रहेगा कि कितने शिक्षकों ने इस कार्ड से यात्र की है। ये कार्ड एमएसटी की तर्ज पर बनेंगे। एआरएम संजीव कुमार ने बताया कि यह प्रक्रिया निदेशालय के स्तर से पूरी होगी

शिक्षकों में शासन की सुविधा पर खुशी: राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक दयानंद श्रीवास्तव और मुनीश यादव ने कहा है कि योगी सरकार का यह शिक्षक समाज के लिए बेहतर कदम है। वहीं राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक नेत्रपाल शर्मा और संतोष श्रीवास्तव ने इस कदम को विशेष सम्मान बताया है।1एटा और कासगंज में 18 शिक्षकों मिलेगा लाभ: इस घोषणा का एटा और कासगंज के 18 पुरस्कृत शिक्षकों को लाभ मिलेगा। एटा में राष्ट्रपति से चार तो राज्यपाल से पुरस्कृत पांच शिक्षक हैं। वहीं कासगंज में भी ऐसे नौ पुरस्कृत शिक्षक हैं।एटा: राष्ट्रपति व राज्यपाल पुरस्कार पा चुके शिक्षकों पर सरकार मेहरबान है। राज्य सड़क परिवहन निगम ने इनको निश्शुल्क यात्र की सुविधा देने का एलान किया है। अब ऐसे शिक्षक मुफ्त में सैर सपाटा करेंगे।1सुविधा के लाभ के लिए इन शिक्षकों के स्मार्ट कार्ड बनाए जाएंगे। आवेदन के 45 दिन के अंदर स्मार्ट कार्ड बनाकर दे दिए जाएंगे। इसके बाद वे प्रदेश में कहीं पर भी रोडवेज बस में निश्शुल्क यात्र कर सकेंगे। स्मार्ट कार्ड की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शिक्षकों से आवेदन भरवाए जा रहे हैं। आवेदन के साथ उनका फोटो पहचान पत्र, पुरस्कार प्रमाण पत्र, दो फोटो और मोबाइल नंबर भी लिया गया है। इसके बाद स्मार्ट कार्ड के नंबर को ईटीएम में फीड किया जाएगा, जिससे जानकारी मिल सके कि कार्ड एक्टिव है या नहीं। परिचालक के पास भी रिकॉर्ड रहेगा कि कितने शिक्षकों ने इस कार्ड से यात्र की है। ये कार्ड एमएसटी की तर्ज पर बनेंगे। एआरएम संजीव कुमार ने बताया कि यह प्रक्रिया निदेशालय के स्तर से पूरी होगी।1शिक्षकों में शासन की सुविधा पर खुशी: राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक दयानंद श्रीवास्तव और मुनीश यादव ने कहा है कि योगी सरकार का यह शिक्षक समाज के लिए बेहतर कदम है। वहीं राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक नेत्रपाल शर्मा और संतोष श्रीवास्तव ने इस कदम को विशेष सम्मान बताया है।1एटा और कासगंज में 18 शिक्षकों मिलेगा लाभ: इस घोषणा का एटा और कासगंज के 18 पुरस्कृत शिक्षकों को लाभ मिलेगा। एटा में राष्ट्रपति से चार तो राज्यपाल से पुरस्कृत पांच शिक्षक हैं। वहीं कासगंज में भी ऐसे नौ पुरस्कृत शिक्षक हैं।

Friday, 26 May 2017

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की बैठकसम्पन्न, बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए जिनमे से संघ की मांग पर निम्न मुद्दों पर सहमति बनी ।

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की बैठकसम्पन्न, बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए जिनमे से संघ की मांग पर निम्न मुद्दों पर सहमति बनी ।


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1-कक्षा 1 से 3 तक की पाठ्य पुस्तकें रंगीन चित्रों से परिपूर्ण।
2-बी टी सी/जे टी सी/डी एड अब डी एल एड के नाम से जाने जायेंगे।
3-डेंगू जैसे रोगों की रोकथाम के उपाय सम्बन्धी पाठ कक्षा 8 की पुस्तक में शामिल होगा।
4-जनपद के अन्दर समायोजन/स्थानांतरण समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी के स्थान पर विभागीय अधिकारी करेंगे।
5-अंतर जनपदीय स्थानांतरण के अर्हता 15 वर्ष का विरोध किया गया।अब पूर्ववत 3 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके शिक्षक अंतर्जनपदीय स्थानांतरण हेतु अर्ह होंगे।
6-जनपद में स्थानांतरण से पूर्व पदोन्नति होंगी।
7-प्रत्येक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद होगा।
8-स्थानांतरण हेतु आवेदक की वरिष्ठता निर्धारण हेतु 50 अंको का पूर्णाक होगा-
अ-असाध्य रोग से पीड़ित को =5अंक
ब-महिला शिक्षक को°=5अंक
स-दिव्यांग को=5 अंक
द-प्रत्येक वर्ष की सेवा पर 1 अंक (अधिकतम 35 अंक)
9-बच्चो को मिलेगी मनभावन रंग की ड्रेस।
10-ड्रेस के पैसे का एक मुश्त भुगतान होगा।

Thursday, 25 May 2017

एक क्लिक पर मिलेगी शिक्षक-शिक्षिकाओं से संबंधित जानकारियां, लाखों टीचरों को जारी होगा इम्प्लाई कोड

एक क्लिक पर मिलेगी शिक्षक-शिक्षिकाओं से संबंधित जानकारियां, लाखों टीचरों को जारी होगा इम्प्लाई कोड

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण करने वाले लाखों शिक्षक-शिक्षिकाओं को शीघ्र सुविधा होने जा रही है कि उनके बारे में कम्प्यूटर पर एक क्लिक करते ही पूरी जानकारी सामने होगी। उसके लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद शीघ्र एक इम्प्लाइज कोड शिक्षक-शिक्षिकाओं को जारी करने जा रहा है। इसकी तैयारियां विभाग में शुरू हो गयी है। संभावना है कि 15 जून के बाद शिक्षक-शिक्षिकाओं को इम्प्लाइज कोड जारी कर दिया जायेगा। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा ने बताया कि अभी तक परिषदीय विद्यालयों के लाखों शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए कोई ऐसा कोड नहीं था कि एक बार क्लिक करते ही संबंधित शिक्षक-शिक्षिका के बारे में पूरी जानकारी मिल सके। उन्होंने बताया कि इस इम्प्लाइज कोड को संबंधित शिक्षक-शिक्षिका के नाम से आवंटित किया जायेगा जिससे कि उनको कोई परेशानी न होने पाये और उनके बारे में सभी जानकारियां विभाग के अफसरों को शीघ्र मिल जाये। इसमें शिक्षक का नाम , पिता का नाम, पता, विद्यालय, उम्र, ज्वाइनिंग तिथि और स्थान व जिला, कहां-कहां कितने दिनों तक नौकरी किया और उसके खिलाफ क्या-क्या कार्रवाई हुई। सचिव श्री सिन्हा ने बताया कि अभी तक इम्प्लाइज कोड न होने से लाखों शिक्षक-शिक्षिकाओं के बारे में जानकारी बीएसए कार्यालय से मांगने पर कई दिनों में आती थी। उसमें भी खामियां रहती थी। ऐसे में जो भी शिक्षक-शिक्षिका जिस जिले में नौकरी कर रहा है उसका डाटा वहीं तैयार होकर इम्प्लाइज कोड से अटैच हो जायेगा। कहा कि इससे पेंशन सहित अन्य देयों में भी सुविधा होगी।

*निर्धारण की बैठक शुरू*

इलाहाबाद। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में जनशक्ति निर्धारण की तैयारियां शुरू हो गयी है। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा की अध्यक्षता में बुधवार को सीमैट के सभागार में कई जिलों के बीएसए और एडी बेसिक की बैठक हुई। इसमें इलाहाबाद, वाराणसी, मिर्जापुर,आजमगढ़ और बस्ती मण्डल के बीएसए और एडी बेसिक शामिल हुए। बैठक दौरान विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं की संख्या सहित अन्य जानकारियां सीडी एवं पेपर पर लिया गया जिससे कि उसका बाद में मिलान किया जा सके। सचिव बेसिक शिक्षा संजय सिन्हा ने बताया कि इसी प्रकार से प्रदेश के सभी मण्डलों के बीएसए एवं एडी बेसिक बैठक में शामिल होंगे। यह लोग अपने जिले और मण्डल के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षक-शिक्षिकाओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित अन्य का विवरण देंगे और उसके बाद विद्यालयों में जनशक्ति का निर्धारण शुरू होगा।

Wednesday, 24 May 2017

एक ही परिसर में संचालित दो स्कूलों का होगा मर्जर

एक ही परिसर में संचालित दो स्कूलों का होगा मर्जर

Tuesday, 23 May 2017

विद्युतिकृत, गैर विद्युतिकृत एवं आंशिक विद्युतिकृत परिषदीय विद्यालयों से सम्बन्धित सूचना उपलब्ध कराने का आदेश जारी, आदेश देखें👇

विद्युतिकृत, गैर विद्युतिकृत एवं आंशिक विद्युतिकृत परिषदीय विद्यालयों से सम्बन्धित सूचना उपलब्ध कराने का आदेश जारी, आदेश देखें👇

एक ही परिसर में संचालित परिषदीय प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों की सूची निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के संबंध में आदेश जारी

एक ही परिसर में संचालित परिषदीय प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों की सूची निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के संबंध में आदेश जारी👇

Sunday, 21 May 2017

यूपी: 5.85 लाख बेसिक शिक्षकों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी अगले हफ्ते

यूपी: 5.85 लाख बेसिक शिक्षकों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी अगले हफ्ते

अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 21 May 2017 02:04 AM IST

राज्य सरकार 5.85 लाख बेसिक शिक्षकों के लिए अगले हफ्ते स्थानांतरण नीति लाएगी। इस बार न सिर्फ सभी आवेदन ऑनलाइन लिए जाएंगे, बल्कि प्रत्येक शिक्षक को भारांक भी दिए जाएंगे। इसके लिए अधिकतम 50 अंक निर्धारित किए गए हैं।

निशक्तता, असाध्य रोग, महिला और सेवाकाल के आधार पर भारांक तय होगा। नई प्रस्तावित नीति पर उच्चस्तर पर सहमति बन चुकी है और सिर्फ इसके जारी होने की औपचारिकता ही बची है।

प्रदेश के 1.58 लाख स्कूलों में 5 लाख 85 हजार 232 शिक्षक पढ़ा रहे हैं। योगी सरकार उनके लिए नई स्थानांतरण नीति लाने जा रही है। इस बार निशक्तता और असाध्य रोग से पीड़ित शिक्षकों के अलावा उन्हें भी स्थानांतरण में तरजीह दी जाएगी, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर पढ़ा रहे हैं और दूसरी जगह जाने के लिए आवेदन किया है।

सूत्रों के मुताबिक, नई स्थानांतरण नीति में अधिकतम 50 भारांक तय किए गए हैं। भारांक के लिए निशक्तता, असाध्य रोग, महिला, सेवाकाल की अवधि, पति-पत्नी के एक ही ब्लॉक में पढ़ाने की इच्छा रखने आदि बिंदु तय किए गए हैं। अपेक्षाकृत ज्यादा भारांक पाने वाले शिक्षक वरीयता सूची में ऊपर होंगे।

*प्रथम सप्ताह में लिए जाएंगे ऑनलाइन आवेदन*

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जून के प्रथम सप्ताह में शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। अंतिम सप्ताह तक सभी आवेदनों पर निर्णय ले लिया जाएगा।

जिन शिक्षकों को नई स्थानांतरण नीति का लाभ मिलेगा, उन्हें हर हाल में पहली जुलाई को नई तैनाती स्थल पर जॉइनिंग करनी होगी। जॉइनिंग में देरी होने पर स्थानांतरण रद्द माना जाएगा। किसी भी शिक्षक का आवेदन रद्द होने पर वेबसाइट पर इसकी वजह का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।

मामले पर बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल का कहना है कि हम अधिकतम अगले 3-4 दिन में शिक्षकों के लिए नई स्थानांतरण नीति लाने जा रहे हैं। जून में हर हाल में स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, ताकि ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल खुलने पर बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित न हो।