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Wednesday, 12 April 2017

*माध्यमिक स्कूलों में 236 दिन होगी पढ़ाई, 129 दिन का रहेगा अवकाश, माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जारी किए निर्देश, सीसीटीवी, बायोमैट्रिक उपस्थिति होगी अनिवार्य*

*माध्यमिक स्कूलों में 236 दिन होगी पढ़ाई, 129 दिन का रहेगा अवकाश, माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जारी किए निर्देश, सीसीटीवी, बायोमैट्रिक उपस्थिति होगी अनिवार्य*

लखनऊ। माध्यमिक विद्यालयों में अब 236 दिन पढ़ाई होगी। जबकि 129 दिन अवकाश रहेगा। प्रत्येक कार्य दिवस में विद्यालय शुरू होने से पहले कक्षा-कक्षों, विद्यालय कैम्पस एवं शौचालय आदि की समुचित साफ-सफाई प्रतिदिन कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा राजकीय, सहायता प्राप्प्त एवं वित्तविहीन विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे तथा बायोमैट्रिक मशीन की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी। 


इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश भेज दिए हैं।पत्र के मुताबिक प्रत्येक कार्य दिवस की शुरुआत छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों की सामूहिक प्रार्थना सभा से की जाएगी। डीआईओएस विद्यालयों में शैक्षिक गतिविधियों एवं अध्यापकों की समय अनुसार उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सतत् रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे। साथ ही इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कराने एवं दिए गए निर्देशों के अनुसार विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण करते रहें। जिससे नए शैक्षिक सत्र में निर्धारित शैक्षिक पंचांग के अनुसार के अनुसार पठन-पाठन व पाठ्य सहगामी क्रियाकलापों का संचालन सुचारू रूप से सम्पन्न हो सके। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने माध्यमिक विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत आगामी एक जुलाई से करने के आदेश दिए हैं।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने राजकीय, एडेड व वित्त विहीन विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि राजकीय विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे एवं बायोमैट्रिक मशीन की व्यवस्था आकस्मिक व्यय मदद, ब्वाएज फंड से की जाए। वहीं, एडेड स्कूल माध्यमिक विद्यालयों में विकास मद से इसकी व्यवस्था की जाए। वित्तविहीन विद्यालयों में यह दोनों व्यवस्था प्रबंध समिति अपने निजी श्रोतों से कराई जाएगी। उन्होंने कहा है कि इन निर्देशों का पालन 15 दिन में करना अनिवार्य होगा।शैक्षिक पंचांग के अनुसार होगा सदनवार छात्रों का विभाजनविद्यालयों में निर्धारित शैक्षिक पंचांग के अनुसार सदनवार छात्रों का विभाजन करते हुए शैक्षिक एवं पाठ्य सहगामी क्रियाकलापों के तहत वाद-विवाद, भाषण, पोस्टर, निबंध प्रतियोगिताएं, अंतराक्षरी एवं स्कॉउटिंग व गाइड कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। वर्ष में दो बार मई एवं जनवरी के प्रथम रविवार को अध्यापक-अभिभावक एसोसिएशन की बैठक की जाए। जिसमें बच्चों के शैक्षणिक, शारीरिक एवं मानसिक स्थितियों से अभिभावकों को रूबरू कराया जाए।कमजोर छात्रों की होगी पहचानविद्यालय में पढ़ने वाले शैक्षिक दृष्टि से प्रतिभाशाली एवं कमजोर छात्रों की पहचान की जाएगी। इसमें कमजोर छात्रों को उपचारात्मक शिक्षा के माध्यम से उनका शैक्षिक एवं मानसिक रूप से विकास किया जाएगा। विद्यालय में विज्ञान क्लब का गठन कर छात्रों को मॉडल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही विज्ञान प्रयोगशाला में विषयवार प्रयोगात्मक कार्य के लिए मासिक पाठ्यक्रम का विभाजन किया जाए।

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