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Monday, 21 November 2016

ललितपुर के शिक्षक ने विद्यालय का रास्ता न होने पर की हेलीकाप्टर की मांग

ललितपुर के शिक्षक द्वारा विद्यालय का रास्ता न होने पर हेलीकाप्टर मांगने की वायरल हुई खबर के बहाने जागरण संपादकीय - सरकारी शिक्षा

 ललितपुर में जिला मुख्यालय स्थित एक सरकारी स्कूल के मास्टर साहब ने अपने अधिकारी से हेलिकॉप्टर मांगा है। दरअसल, जिस स्कूल में उनकी ड्यूटी लगाई गई है वहां जाने के लिए रास्ता नहीं है। खेत से होकर जाना पड़ता है पर अब खेत मालिक ने रास्ते में पानी भर दिया है। दूसरा रास्ता है मगर वहां पुलिया नहीं है। शिक्षक ने हेलिकॉप्टर उपलब्ध न करा पाने की स्थिति में विभाग को यह विद्यालय बंद कर देने का भी सुझाव दिया है।

 विभाग के अफसर भले ही इसे तूल न दे रहे हों लेकिन, यह प्रार्थना पत्र शिक्षा महकमे में चर्चा का विषय बना है। सोशल मीडिया पर भी यह वायरल हो गया है। लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ये गुरुजी हाल ही में शिक्षामित्र से समायोजित होकर सहायक अध्यापक तैनात किए गए थे।


सूबे के सरकारी स्कूलों से जुड़ी अव्यवस्थाओं की यह बानगी मात्र है। अधिकतर स्कूलों में बच्चों के अनुपात में शिक्षकों की उपस्थिति नहीं है। उनके पद खाली चल रहे हैं। बच्चे प्रतिदिन स्कूल आते तो हैं पर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती। वजह, शिक्षकों की कमी। जो हैं वो भी समय से स्कूल नहीं आते। आएदिन छुट्टियां लेते रहते हैं। नुकसान स्कूल के बच्चों का होता है। कई-कई दिन ऐसा होता है कि बच्चे स्कूल आते हैं, प्रार्थना करते हैं, मिड डे मील खाते हैं और बस्ता लेकर घर निकल जाते हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्रएं ज्यादातर गरीब घरों के होते हैं। उनके माता-पिता भी अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे होते हैं। ऐसे में वे पढ़ाई को लेकर बहुत ज्यादा पूछताछ भी नहीं करते। अगर इन बच्चों के अभिभावक थोड़ा भी जागरूक होते तो स्तरहीन पढ़ाई को लेकर स्कूल प्रबंधन से नाराजगी जताते। ऊपर के अधिकारियों तक शिकायत करते तो शायद शिक्षा व्यवस्था में कुछ सुधार होता। 


सरकार भले ही दावा करे कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं पर किसी स्कूल तक पहुंचने के लिए रास्ता ही न हो तो कया इन दावों पर विश्वास किया जा सकता है। जब मास्टर साहब ही स्कूल नहीं पहुंच पा रहे तो बच्चे कैसे आते होंगे, यह सोचने वाली बात है। जाहिर है स्कूल बिना बच्चों के ही चल रहा होगा। जरूरत है दावों से ऊपर उठकर धरातल पर कुछ करने की। तभी भविष्य की पीढ़ी को हम रास्ता दिखा पाएंगे।

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