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Saturday, 26 November 2016

नौनिहालों की शिक्षा का ‘आधार’ तय करेगी सीबीएसई

नौनिहालों की शिक्षा का ‘आधार’ तय करेगी सीबीएसई

डिजिटल इंडिया के अंतर्गत पूरे सिस्टम को ऑनलाइन करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने ऑनलाइन एफिलिएटेड स्कूल इंफॉर्मेशन सिस्टम (ओएसिस) को लागू कर दिया है। इसके अंतर्गत जहां स्कूलों से करीब डेढ़ सौ वर्गो में पूरी जानकारी ऑनलाइन मांगी जा रही है, वहीं सीबीएसई चेयरमैन राजेश कुमार चतुर्वेदी ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षण व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने और कार्यालयों में ‘पेपर लेस’ कार्यवाही के लिए हर स्कूल को यह जानकारियां सीबीएसई को मुहैया करानी होंगी। शांति निकेतन विद्यापीठ में गुरुवार को शुरू हुए चार दिवसीय सीबीएसई नॉर्थ जोन बैडमिंटन चैंपियनशिप 2016 का शुभारंभ करने पहुंचे राजेश कुमार चतुर्वेदी ने सीबीएसई की कई योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया।

कक्षा एक से बनेगा आधार डाटा

सीबीएसई आधार मेकिंग सेंटर का रजिस्ट्रार बनने जा रहा है। इस कड़ी में हर सीबीएसई स्कूल को आधिकारिक तौर पर आधार नंबर रजिस्ट्रेशन सेंटर बनाया जाएगा। कक्षा एक में दाखिला लेने वाले बच्चों का आधार डाटा कैप्चर किया जाएगा। यही डाटा उस बच्चे के 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा के अलावा सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में इस्तेमाल किया जाएगा। स्कूल बदलने पर केवल स्कूल कोड अपडेट कराना होगा। केवल पता स्कूल स्तर पर बदला जा सकेगा। बाद में डाटा में परिवर्तन की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।

हर कक्षा पर सीबीएसई की नजर

सीबीएसई से मान्यता मिलने के बाद भी स्कूलों में कक्षा आठवीं तक मनमाने ढंग से किताबें लगाकर पढ़ाया जा रहा है। बोर्ड हर सीबीएसई स्कूल में कक्षा एक से 12वीं तक की गुणवत्ता का निरीक्षण करेगा। स्कूलों में शुरू से ही सीबीएसई द्वारा जारी किताबें ही लगानी होंगी। आठवीं तक की गुणवत्ता खराब होने के कारण ही नौवीं के बाद या उच्च शिक्षा में बच्चों का प्रदर्शन बेहद खराब होता है। मानकों पर खरे न उतरने वाले स्कूल मान्यता से बाहर होंगे।

सीसीटीवी वाले स्कूल ही बनेंगे परीक्षा केंद्र

ओएसिस के अंतर्गत करीब 150 वर्गो में ली जा रही स्कूलों की जानकारी का इस्तेमाल बोर्ड की ओर से परीक्षा में किया जाएगा। बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण जिला स्तर पर नहीं बल्कि बोर्ड की ओर से ऑनलाइन साफ्टवेयर के जरिए किया जाएगा। साथ ही बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि बोर्ड परीक्षा केंद्र उन्हीं स्कूलों को बनाया जाएगा, जहां सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे।

सर्टिफिकेट के डाटा नहीं बदले जाएंगे

सीबीएसई चेयरमैन ने स्पष्ट कर दिया है कि बोर्ड के पास वर्तमान में व्याप्त करीब 37 हजार परिवर्तन आवेदनों में कोई कार्रवाई नहीं होगी। बच्चों की उम्र घटाने-बढ़ाने के खेल को बंद करने के लिए ही ओएसिस के अंतर्गत बोर्ड परीक्षा फार्म में माता-पिता के हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं, जिससे बाद में नाम में कोई परिवर्तन न किया जा सके। ऐसे परिवर्तन अक्सर गैर कानूनी इस्तेमाल के लिए कराए जा रहे हैं।

प्रतियोगी परीक्षा में लगेंगे अंगूठे

नीट, नेट, जेई्रई, मेडिकल जैसी तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी अभ्यर्थियों को रोकने के लिए सीबीएसई के सभी 1600 परीक्षा केंद्रों पर अब परीक्षार्थियों का एडमिट कार्ड चेक करने की बजाय उनके अंगूठे का स्कैन किया जाएगा। यह स्कैन स्कूलों में बने आधार से मिलान किया जाएगा। अभ्यर्थी सही होने पर ही उसे परीक्षा में बैठने की इजाजत मिलेगी।

तीन दिन में मिलेगा रिजल्ट

प्रतियोगी परीक्षा के केंद्रों पर अब अभ्यर्थियों के ओएमआर स्कैन कर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए डाटा सीबीएसई तक पहुंचेगा। विशेष साफ्टवेयर से ओएमआर स्कैन कर रिजल्ट तैयार किया जाएगा। तीन दिन के बाद परीक्षार्थी का ओएमआर और सर्टिफिकेट की एक कॉपी उसके डिजिटल लॉकर में रखे दिए जाएंगे। हर परीक्षार्थी तीन दिन बाद स्वयं ही अपने रिजल्ट डिजिटल लॉकर में देख व प्रिंट कर सकेंगे।

2018 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा

दसवीं में स्कूल बेस्ड को हटाकर बोर्ड बेस्ड किए जाने की अटकलों पर सीबीएसई चेयरमैन ने स्पष्ट कर दिया कि इस वर्ष नौवीं में पढ़ रहे छात्र साल 2018 में बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि समय-समय पर नए विषय लागू किए जाने की दिशा में सीबीएसई मूल शिक्षा से विमुख हो गई है। बच्चों की मूल शिक्षा के साथ मूल्यों की शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। अंग्रेजी विषय में 90 या 100 नंबर पाने वाले बच्चों की खराब गुणवत्ता पर चेयरमैन ने कहा कि इसके जिम्मेदार शिक्षक व प्रधानाचार्य हैं, जिन्होंने अपने स्कूल के नंबर बढ़ाने की होड़ में अधिक से अधिक नंबर देने शुरू किए। इसे सुधारना भी स्कूलों को ही पड़ेगा।

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